‘हवा भी क़ैद कर लेते’ में संग्रहीत अधिकांश मुक्तक राजनीति के गिरते स्तर, सामाजिक अव्यवस्था तथा पारिवारिक जीवन में नैतिक मूल्यों की कमी पर करारी चोट करते हैं। मुक्तकों में अद्भुत सामर्थ्य और विचार रखने वाले देवेश ने अपने मुक्तकों से सोशल मीडिया पर भी सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ को जितनी स्पष्टता और तल्खी के साथ उन्होंने पेश किया, वह उनके बड़े साहस को प्रकट करता है।
– उदयप्रताप सिंह




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