गीत मुझे तुम पर लिखना है’ पलामू के जन कवि हरिवंश प्रभात का ऐसा गीत-संग्रह है, जिसमें जीवन के अनेक रूप सहजता के साथ अभिव्यक्त होते हैं। इस संग्रह का केंद्र भाव प्रेम है, लेकिन यह प्रेम केवल एक संबंध तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्मृतियों, प्रतीक्षा, प्रकृति और मनुष्य के भीतर चलने वाले संवाद तक फैल जाता है।
इन गीतों में एक ओर निजी अनुभवों की ऊष्मा है, तो दूसरी ओर समाज और परिवेश की झलक भी मिलती है। कवि ने अपने आसपास के जीवन – गाँव की सादगी, शहर की हलचल, ऋतुओं के बदलाव और रिश्तों की जटिलता को सरल शब्दों में पिरोया है। कई गीत ऐसे हैं जो सीधे मन से निकलते प्रतीत होते हैं, जबकि कुछ पाठक को सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।




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