‘आम्र कुंज में पड़ी खाट’ एक ऐसा काव्य संग्रह है, जो मानव जीवन के हर पक्ष— जीवन, स्त्री, प्रेम, आत्मदर्शन, प्रकृति और आध्यात्म को एक सूत्र में पिरोता है। कवयित्री की भाषा सहज, लयबद्ध, और भावनात्मक है, जो गीतात्मकता और दार्शनिक गहराई का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है। प्रतीकों (जैसे, नदी, हिमालय, फूल, धूप) और बिंबों का उपयोग कविताओं को सार्वभौमिक बनाता है, जो व्यक्तिगत अनुभवों को सामाजिक और आध्यात्मिक संदर्भों से जोड़ता है। कविताएँ सामाजिक रूढ़ियों, नारी के संघर्ष, और प्रकृति के प्रति मानव की असंवेदनशीलता पर तीखा प्रहार करती हैं, साथ ही प्रेम, भक्ति और आत्मिक शांति की खोज को प्रेरित करती हैं।
‘आम्र कुंज में पड़ी खाट’ शीर्षक प्रतीकात्मक है और प्रकृति से जुड़कर आत्मचिंतन द्वारा जीवन के सभी पक्षों को परखने और समझने को उकसाता है।
इस संग्रह की कविताएँ मानव जीवन की जटिलताओं को सरलता, संवेदनशीलता और सौंदर्य के साथ प्रस्तुत करती है। प्रत्येक खण्ड अपने आप में पूर्ण है, फिर भी सभी खण्ड मिलकर एक ऐसी काव्यात्मक सृष्टि रचते हैं, जो पाठक को जीवन के हर रंग—हर्ष, तड़प, भक्ति और शांति के साथ जोड़ती है। यह संग्रह न केवल कविता प्रेमियों के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है, जो जीवन को गहराई से समझना और जीना चाहता है।
| Author | राधा जनार्दन |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-49947-92-4 |
| Language | Hindi |
| Pages | 200 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | कविता |



Reviews
There are no reviews yet.