यथार्थ के धरातल पर डॉ. अमर पंकज की ग़ज़लें / सम्पादक अनिरुद्ध सिन्हा

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समकालीन हिन्दी ग़ज़ल के परिदृश्य में जिन रचनाकारों ने अपने सृजन से न केवल पाठकों का ध्यान आकृष्ट किया है, बल्कि आलोचकों और अध्येताओं को भी गंभीर विमर्श के लिए प्रेरित किया है, उनमें डॉ. अमर पंकज का नाम आज अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रस्तुत पुस्तक ‘यथार्थ के धरातल पर : डॉ. अमर पंकज की ग़ज़लें’ ऐसे ही एक महत्त्वपूर्ण रचनाकार के व्यक्तित्व, कृतित्व और काव्य-दृष्टि का समग्र, बहुआयामी और विचारोत्तेजक मूल्यांकन है।
यह पुस्तक केवल एक ग़ज़लकार की प्रशस्ति नहीं है, बल्कि समकालीन हिन्दी ग़ज़ल की वैचारिक, सामाजिक और सौंदर्यात्मक यात्रा का एक प्रामाणिक दस्तावेज़ भी है। डॉ. अमर पंकज की षष्ठीपूर्ति के अवसर पर संपादित इस ग्रंथ में देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े वरिष्ठ और युवा; तीनों पीढ़ियों के साहित्यकारों, आलोचकों, इतिहासकारों और ग़ज़लकारों के आलेख सम्मिलित हैं। ये आलेख न केवल डॉ. अमर पंकज की ग़ज़लों का सूक्ष्म विश्लेषण करते हैं, बल्कि हिन्दी ग़ज़ल की समकालीन प्रवृत्तियों को समझने की एक सशक्त दृष्टि भी प्रदान करते हैं।
इस पुस्तक में सम्मिलित आलेख यह स्पष्ट करते हैं कि डॉ. अमर पंकज की ग़ज़लें किसी एक विषय या भाव-भूमि तक सीमित नहीं हैं। वे बहुआयामी हैं- कहीं सामाजिक प्रतिरोध का स्वर हैं, कहीं इतिहास की स्मृति से उपजा विवेक, कहीं प्रेम और सौंदर्य की कोमल अनुभूति, तो कहीं जीवन की विडंबनाओं पर करुण मुस्कान। उनकी भाषा सहज, संप्रेषणीय और हिंदुस्तानी मिज़ाज की है, जिससे वे पाठक और श्रोता;दोनों से सहज संवाद स्थापित कर पाते हैं।

Author

सं. अनिरुद्ध सिन्हा

Format

Hardcover

ISBN

978-93-47306-69-3

Language

Hindi

Pages

320

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

आलोचना

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