वेदना पिघल रही / पूनम सिन्हा ‘श्रेयसी’

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‘गीत-अगीत कौन सुंदर है’: दिनकर ने कभी इस तरह इस पूरे विवाद पर चुटकी ली थी और मनहर ढंग से इंगित किया था कि किसी भी शिल्प में जीवन की विडम्बनाएँ करीने से कौंध सकती हैं।
पूनम जी के ये गीत कलरव की तरह सहज हैं। जीवन-जगत की विसंगतियां संवेदनशील चित्त में आंदोलन जगाते हैं, और वंचितों के पक्ष में खड़ी स्त्री कभी मिथकों के द्वार जाती है, कभी इतिहास-दर्शन के कि कहीं कुछ तो कुछ समाधान सूझे। प्रकृति से गीतकार ने अनेक बिंब लिए हैं और जनजीवन से भी।

– अनामिका

Author

पूनम सिन्हा 'श्रेयसी'

Format

Paperback

ISBN

978-93-49136-32-8

Language

Hindi

Pages

112

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

गीत

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