वात कवइ गई वातऽ वात / छोगालाल कुमरावत ‘सुजस’

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समय की धार पर जब लोकभाषाओं का क्षरण द्रुततर है, सुजस जी की ग़ज़लों में निमाड़ी का ठेठ आत्मिक रस अपने आस्वाद में डुबा देता है। संत सिंगा और पवित्र नर्मदा की निमाड़ी भूमि का भोलापन, सादगी और सरलता सुजस जी की ग़ज़लों में साक्ष्य की तरह हिलोरे लेता है। सुजस की ग़ज़लें भारतीयता की निमाड़ी स्मृति और समकाल का कथन करती हैं। निमाड़ी लोक संसार, आध्यात्मिकता, खेती किसानी सम्बन्धी शब्दावली, कहावतें और मुहावरे, लोकोक्तियाँ और उनकी भावभूमि उनके जीवन और आचरण से उन्हें सहज प्राप्त हुई है। निर्गुण संतो की भाव-भूमि और देसणा निमाड़ी संस्कारों के चेतन और अवचेतन में बहुत दूर-दूर तक रची बसी है। सुजस की ग़ज़लें अपनी मिठास के साथ-साथ इसको भी बताती चलती हैं। सुजस की ग़ज़लें मात्र वैराग्य या मोक्ष…

Author

छोगालाल कुमरावत ‘सुजस’

Format

Hardcover

ISBN

978-93-47306-62-4

Language

निमाड़ी

Pages

128

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

ग़ज़ल

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