उम्र का दरिया / गुरचरन मेहता ‘रजत’

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शब्द जब केवल बोलें ही नहीं, महसूस किए जाएँ और उन्हें पढ़कर भावनाएँ जब स्वतः उभरने लगें तो रचनाकार का प्रयास सार्थक सिद्ध होता है। ‘रजत’ जी की ग़ज़लें भी कुछ ऐसा ही असर डालती हैं। उनका ग़ज़ल-संग्रह आज के समय की सामाजिक, व्यक्तिगत और भावनात्मक स्थितियों को इतने सहज और सशक्त ढंग से व्यक्त करता है कि पाठक मजबूर हो जाता है सोचने के लिए, महसूस करने के लिए।

भूपेन्द्र सिंह

Author

गुरचरन मेहता 'रजत'

Format

Paperback

ISBN

978-93-49947-15-3

Language

Hindi

Pages

136

Publisher

Shwetwarna Prakashan

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