संग्रह में गीता शुक्ला ‘गीत’ की पचहत्तर लघुकथाओं के साथ उनके भाई रामलाल मिश्र की भी बीस लघुकथाएँ ‘पड़ोसी धर्म’ शीर्षक से सम्मिलित हैं। इसके पीछे उनका उद्देश्य अपने भाई को लघुकथा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करना ही है। समग्रतः संग्रह की पंचानबे लघुकथाओं का यह संग्रह सुधी भावकों को न केवल कथा का आनन्द देगा, अपितु चिन्तन के कुछ आयाम खोलने में भी समर्थ होगा, ऐसा विश्वास है।
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