कुँअर उदयसिंह ‘अनुज’ को काव्यशास्त्रीय लेखन बहुत लुभाता है। उन्होंने कविता, गीत, नवगीत, ग़ज़ल, और दोह-छंद पर हिंदी और निमाड़ी में, बेबाक कलम चलाई है। दोहे के लघु कलेवर में रचनाकार को अपनी ओर से कुछ कहने समझाने का बहुत कम अवकाश होता है; तब भी दोहाकार, गिनती के कुछ शब्दों में, अपनी बात बयाँ कर ही देते हैं। कुँअर ‘अनुज’ ने अपने संग्रह में दोहों के माध्यम से निमाड़ के जन-मानस को, उसकी वास्तविकता में, पूरी साफ़गोई से उकेरा है। तपती संवेदनाओं में पिघलते रिश्ते, आधुनिकता की आरती में कपूर होती परम्पराएँ, और गाँवों में घुसती विकृत राजनीति के अलावा, निमाड़ के विशेष व्यंजन, फसलें, निमाड़ का भूगोल और उसकी गौरव-गाथा के दर्शन, संग्रह के इन दोहों में साथ-साथ झलकते हैं।
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