‘समीक्षा के वातायन से’ लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की एक महत्त्वपूर्ण समीक्षात्मक कृति है, जिसमें समकालीन हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं- कविता, नवगीत, दोहा, कहानी, लघुकथा, व्यंग्य और जीवनी; की कुल 22 पुस्तकों पर लिखी गई समीक्षाएँ संकलित हैं। यह पुस्तक लेखक की संवेदनशील और सहृदय पाठकीय दृष्टि का परिचय देती है, जहाँ वे स्वयं को पारंपरिक आलोचक न मानते हुए एक जागरूक पाठक के रूप में प्रस्तुत करते हैं। प्रत्येक कृति को गहराई से पढ़कर उसके मर्म तक पहुँचने और यह बताने का प्रयास किया गया है कि वह पुस्तक क्यों पठनीय और महत्वपूर्ण है।
इस कृति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संतुलित, निष्पक्ष और सहज भाषा में व्यक्त समीक्षा-दृष्टि है, जिसमें वरिष्ठ और नवोदित दोनों प्रकार के रचनाकारों को समान महत्व दिया गया है। सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदना, स्त्री-विमर्श और समकालीन जीवन की विसंगतियों को केंद्र में रखकर की गई ये समीक्षाएँ पाठक को न केवल साहित्य से जोड़ती हैं, बल्कि उसे सोचने और समझने की नई दृष्टि भी प्रदान करती हैं। इस प्रकार ‘समीक्षा के वातायन से’ एक उपयोगी, पठनीय और मार्गदर्शक ग्रंथ के रूप में समकालीन हिन्दी साहित्य की समझ को समृद्ध करता है।
| Author | लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-93-47306-95-2 |
| Language | Hindi |
| Pages | 168 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | आलोचना |




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