‘रहे निहार रमेश’ रमेश कुमार सिंह का कुंडलिया छंदों का एक सशक्त एवं विविधवर्णी काव्य-संग्रह है। इसमें भारतीय संस्कृति, धर्म, पौराणिक प्रसंग, महापुरुष, देशभक्ति तथा समकालीन सामाजिक जीवन के अनेक आयाम सहज और सरस शैली में अभिव्यक्त हुए हैं। राम, कृष्ण, शिव, हनुमान, गीता, काशी और अयोध्या जैसे सांस्कृतिक प्रसंगों के साथ इतिहास और स्वतंत्रता की स्मृतियाँ भी रचनाओं में जीवंत होती हैं। वहीं राजनीति, पर्यावरण, शिक्षा, श्रम, पारिवारिक संबंध और बदलते मानवीय मूल्यों पर कवि की संवेदनशील दृष्टि संग्रह को समकालीन सरोकारों से जोड़ती है।
लोकजीवन, ग्रामीण संस्कृति, खेती, पर्व-त्योहार और प्रकृति की आत्मीय उपस्थिति इस पुस्तक को जीवन की मिट्टी से जोड़ती है। यह संग्रह परंपरा और वर्तमान संवेदना का सुंदर काव्य-संगम है।



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