‘रघुनंदिनी’ शांता और शृंगी की अमर प्रेम कथा है, जिसमें विश्वास और समर्पण का अद्भुत संगम छिपा है। अब प्रश्न उठता है कि शांता कौन थी? वह रघुनंदिनी कैसे है? यह पुस्तक इन्हीं प्रश्नों का तो उत्तर देती है।
शांता रूपी उस अग्नि से हमें परचित कराती है, जिसने जब शस्त्र उठाए तब असुरों का संहार किया। जब उसने वेद पढ़े तो स्त्रियों को आत्मबल और संस्कार दिए। जब उसने प्रेम किया तो एक महर्षि को संवेदना की भाषा दी, और जब यज्ञ किया तो युग को धर्म दिया, मर्यादा दी।
| Author | प्रतिमा अखिलेश |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-49947-01-6 |
| Language | Hindi |
| Pages | 136 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | उपन्यास |



वंदना सोनी विनम्र –
रघुनंदनी में शांता जी के विषय में लिखा हुआ उपन्यास है।जो श्री राम चंद्र जी बड़ी बहन थी। प्रायः यह बहुत कम लोग जानते होगे।भगवान श्री राम जी की भी बहन थी।और उनका विवाह श्रृंगी ऋषि के साथ हुआ था। जिन्होंने पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया था।जिसमे शांता जी ने खीर बनाई थी।बड़ी ही रोचक उपन्यास है।
Archana Nayudu –
प्रायः पाठकों ने शांता का नाम केवल संदर्भों में सुना है, किंतु यहाँ उनका चरित्र विस्तार पाता है।
प्रतिमा अखिलेश का यह उपन्यास केवल एक प्राचीन कथा का पुनर्लेखन नहीं, बल्कि यह प्रश्न खड़ा करता है कि स्त्री की आकांक्षाएँ और अस्तित्व को किसी यज्ञ या राजनीति से छोटा क्यों समझा गया? यह कृति पाठक को सोचने पर मजबूर करती है कि इतिहास के हाशिये पर डाल दिए गए पात्र भी कितने जीवंत और संवेदनशील रहे होंगे।
“रघुनंदिनी” उन कथाओं को पुनर्जीवित करता है जिन्हें अब तक उपेक्षित कर दिया गया था। यह उपन्यास पौराणिक कथाओं के साथ–साथ नारी विमर्श और मानवीय संबंधों की गहराई को पाठकों के सामने लाता है। गंभीर साहित्य के पाठकों, पौराणिक कथा–प्रेमियों और नारी–दृष्टि से समाज को देखने वालों के लिए यह एक महत्वपूर्ण और पठनीय कृति है।
Mahi Shrivastava –
‘शांता–श्रंगी’ केवल एक कथा नहीं, बल्कि इतिहास के हाशिए से उठती हुई एक मार्मिक पुकार है, जो पाठक के दिल को गहराई तक छू लेती है। बहुत सुंदर कहानी है और इसको पढ़के काफी कुछ जानने और सीखने को मिला। युवा जरूर पढ़ें।
Poonam Vishal Jwell –
शांता और श्रृंगी की सुंदर पवित्र प्रेम कथा , इतने सुंदर शब्दों में लिखा है जैसे सब कुछ आंखों से देख रही हूं। इतना सुंदर त्याग समर्पण, सम्मान और प्रेम का वर्णन किया गया है। हर भाव मन के भीतर चलते हुए भी मुख मंडल पर राजसी तेज और आत्मविश्वास का श्रृंगार किए स्त्री के बहुत निष्कलंक स्वरूप की प्रस्तुति है रघुनंदिनी ।
अवश्य पढ़ें और अपनों को भेंट देकर इस दैविक सत्य से परिचित कराएं 🙏