शाइरी को समर्पित संस्था ‘परवाज़-ए-ग़ज़ल’ द्वारा अब तक एक दर्जन से अधिक साझा-संकलन और नायाब अशआर की पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं। शाइरी के मे’ आर को बनाए रखने के लिए यह संस्था उम्दा संकलनों एवम् मे’ आरी निशस्तों के जरीए निरंतर प्रयासरत है।
‘गुहर-ए-नायाब’ (उद्धरणीय अशआर का संकलन) के बाद इसी कड़ी में आने वाली इस पुस्तक के माध्यम से देश-विदेश के शाइरों के पठनीय व संग्रहणीय अशआर सुधि पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया गया है।



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