जीवन अपने आप में एक कहानी है। कभी रिश्तों की मिठास, कभी बदलते समय की चुनौतियाँ, कभी सामाजिक विसंगतियाँ और कभी मन के अनकहे भाव। इन्हीं विविध अनुभवों और जीवन के अनेक रंगों का साहित्यिक संकलन है ‘परिदृश्य’।
निरु लखोटिया की यह पुस्तक कहानियों, कविताओं और विचारोत्तेजक आलेखों का ऐसा संग्रह है, जिसमें पाठक को अपने आसपास की दुनिया की झलक दिखाई देती है। इसमें पारिवारिक रिश्तों, स्त्री-जीवन, आत्मनिर्भरता, बदलती सामाजिक परिस्थितियों, पीढ़ियों के बीच के अंतर, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के छोटे-बड़े अनुभवों को सहजता से अभिव्यक्त किया गया है।
पुस्तक की कहानियाँ कभी रिश्तों की जटिलताओं से रूबरू कराती हैं, तो कभी आत्मविश्वास, संघर्ष और बदलते दृष्टिकोण की प्रेरक झलक प्रस्तुत करती हैं। कविताएँ जीवन, दोस्ती, प्रकृति, शिक्षा और स्मृतियों के भावपूर्ण संसार से जोड़ती हैं। वहीं, आलेख समाज, परिवार, संस्कृति और समकालीन विषयों पर विचार करने का अवसर देते हैं। कोरोना काल से जुड़ी रचनाएँ उस असाधारण दौर के अनुभवों और प्रभावों को भी सामने लाती हैं।
| Author | निरु लखोटिया |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-81-68494-53-4 |
| Language | Hindi |
| Pages | 152 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | विविध |
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