एक सक्रिय युवा पीढ़ी का होना किसी भी विधा के लिए वरदान से कम नहीं है। नवगीत का यह सौभाग्य ही है कि उसे समय-समय पर सक्रिय युवा पीढ़ी मिलती रही है। वर्तमान में भी दो दर्जन से अधिक युवा रचनाकार इस विधा में अपना योगदान देने हेतु निरंतर सक्रिय हैं। इनमें से वे छः रचनाकार जिन्होंने पिछले एक दशक में नवगीत की कमान सँभाली है, इस पुस्तक में शामिल हैं। इन रचनाकारों के दो या उससे अधिक नवगीत-संग्रह प्रकाशित हैं तथा वे निरंतर नवगीत को साहित्य के केन्द्र में रखने के लिए प्रयत्नशील हैं। परम्परा को निभाते, विरासत को सँभालते, समकालीनों को झकझोरते और नयी पीढ़ी के लिए सोपान गढ़ने वाले ये रचनाकार नवगीत के युवा स्तंभ ही हैं। इन युवा रचनाकारों ने सक्रिय लेखन के साथ ही नवगीत के परिवेश को निरंतर गतिशील बनाया है। आलोचना से लेकर सम्पादन तक इनका दखल इन्हें विशिष्ट बनाता है।
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