‘नटखेला उर्फ बन्ना गोसाईं’ की यह कथा समय की चुनौतियों को स्वीकार ही नहीं करती, डटकर उसका सामना भी करती है। मुख्य कथाओं के साथ-साथ छोटी-छोटी कई अन्तर्कथाएँ कभी अपको झकझोरेंगी, कभी गुदगुदाएंगी और कभी सोचने पर बाध्य भी कर देंगी।
‘नटखेला उर्फ बन्ना गोसाईं’ की यह कथा समय की चुनौतियों को स्वीकार ही नहीं करती, डटकर उसका सामना भी करती है। मुख्य कथाओं के साथ-साथ छोटी-छोटी कई अन्तर्कथाएँ कभी अपको झकझोरेंगी, कभी गुदगुदाएंगी और कभी सोचने पर बाध्य भी कर देंगी।
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