कविता संग्रह ‘मुनादी’ में समाहित कविताएँ एक मद्धिम लय की सांगीतिक शब्दावलियों में पाठक से अंतर्संवाद करते चलते हुए जाने कब लवण की भाँति आनंदरस में घुल जाती हैं पता ही नहीं चलता। रचना प्रक्रिया के बीच अनायास की स्थिति में लेखक के माध्यम से अभिव्यक्त इन शब्दावलियों में अपने स्पिरिट के नाद-अनुनाद को पाठक ध्यान लगाकर ठीक से सुन सकता है। यह बहुत अच्छी और भली-सी लगने वाली बात है कि अपनी कलम से आत्मा की अभिव्यक्ति को दर्ज करने में विश्वास रखने वाले अनिल सिंह ‘सत्यप्रिय’ की मेधा विशुद्ध भारतीय सुगंध के चैतन्याकाश में पुष्पित-पल्लवित हुई है। कवि की रचनाएँ एक लयबद्ध तरंग बनकर पाठक के भीतर उतरने की सामर्थ्य से परिपूर्ण हैं। इसे लेखक की सहजता और सादगी का सौंदर्य कहना अधिक उचित होगा। ध्यान में उतर सकने वाले ऐसे सत्यप्रिय लेखक आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
~ राग तेलंग, कवि/आलोचक (भोपाल)



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