‘मुकुंद-माधव-मनमोहन’ राघव शुक्ल की गीत-रचना ही नहीं गीत-भागवत है। इसमें श्रीमद्भागवत के दर्शन और हरि-प्रेमी चेतना को सहज, लयात्मक और भक्ति-रस से आप्लावित गीतों में अभिव्यक्ति मिली है। इस कृति के 108 गीत वस्तुतः 108 भाव-सोपान हैं, जो पाठक को ईश्वर के अधिक निकट ले जाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इनमें शास्त्र की गरिमा और लोक-संवेदना का सुंदर समन्वय है; छंद की लयात्मकता, शब्दों की संगीतात्मकता और भावों का उच्छ्वास मिलकर ऐसा काव्य-संसार रचते हैं, जहाँ श्रीहरि की महिमा के साथ ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, समर्पण और आत्मबोध की चेतना निरंतर प्रवाहित होती है। लेखक की दीर्घ साधना से सृजित यह कृति केवल पठनीय गीत-संग्रह नहीं, बल्कि भगवद्प्रीति की ओर उन्मुख करने वाली एक भावपूर्ण आध्यात्मिक पाठावली है।
| Author | राघव शुक्ल |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-81-903288-5-2 |
| Language | Hindi |
| Pages | 128 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | गीत |



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