हिंदी कहानी की सुदीर्घ परंपरा में डॉ. कमल चतुर्वेदी का सद्यः प्रकाशित कहानी-संग्रह ‘मेरा घर कहाँ है’ एक ऐसे संवेदनशील हस्तक्षेप के रूप में उपस्थित हुआ है, जो आधुनिकता की अंधी दौड़ में हाँफते हुए मानवीय रिश्तों और दरकते हुए सामाजिक मूल्यों की नब्ज़ टटोलता है। यह संग्रह केवल पंद्रह कहानियों का संग्रह भर नहीं है, बल्कि बदलते हुए भारतीय समाज का वह कोलाज है, जिसमें मध्यवर्गीय जीवन की विडंबनाएँ, टूटते संयुक्त परिवार, वृद्धों का अकेलापन, पलायन की पीड़ा और स्त्री-मन के अनुत्तरित प्रश्न पूरी शिद्दत से उभरकर सामने आते हैं। संग्रह की प्रत्येक कहानी अपने भीतर एक पूरा संसार समेटे हुए है, जो पाठक को अपने गिरेबाँ में झाँकने को विवश करती है।
| Author | डॉ. कमल चतुर्वेदी |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-93-47306-39-6 |
| Language | Hindi |
| Pages | 80 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | उपन्यास |



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