मया के किताब / शिव निश्चिन्त

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‘मया के किताब’ शिव निश्चिन्त जी के छत्तीसगढ़ी गीतों और ग़ज़लों का संग्रह है। कवि कहते हैं- “मोर ये गीत-ग़ज़ल संग्रह मा ओहि सब पुराना गीत मन शामिल हें जेन ला मैं ‘माटी बनिस गुलाल’ बर लिखे रहेंव। बहुत दिन होगय मैं नवा गीत लिखे भी नइ हंव। हाँ ये संग्रह म शामिल सबे ग़ज़ल मन नवा हे। एकर सेती नवा हे के पहिली पहिली के दिन मा छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल के चलन नइ रहिस, अउ रहिस भी होही त मोला मालूम नइ हे। मैं तो सोचे भी नइ रहेंव के कभू मैं छत्तीसगढ़ी मा गीत-ग़ज़ल के कोई संग्रह निकलवाहूँ, अभी अब जब ग़ज़ल लिखे के शुरुआत करेंव तब मन म सोचेंव के काबर न एक ठन संग्रह निकलवा लिये जाय। गीत के संग्रह निकलवातेंव तौ अतेकन मोर मेर गीत नइ रहिस, वोही सब पुराना गीत मन फटहा डायरी म लिखाय रहिस। ग़ज़ल संग्रह बर अतेक अकन ले ग़ज़ल नइ रहिस, त येकर सेती सोचेंव के दुनो ल शामिल करके गीत-ग़ज़ल संग्रह निकलवा दंव। मोर ये छत्तीसगढ़ी गीत-ग़ज़ल संग्रह के भाषा ह वोही बोलचाल के भाषा आय जेन मोर गृह ग्राम क्षेत्र (पंडरिया ग्राम, पहिले के बिलासपुर जिला अब कबीरधाम) मा बोले जाथे। मोर संग्रह के छत्तीसगढ़ी हा ठेठ अउ मानक तो बिल्कुल नइहे, तभो हिम्मत करे हंव। अब के वोति के लेखक मन मोर ले बढ़िया ठेठ छत्तीसगढ़ी म लिखत हवें। जेन ह मीठ भी लागथे।”

Author

शिव निश्चिन्त

Format

Paperback

ISBN

978-93-49947-86-3

Language

छत्तीसगढ़ी

Pages

84

Genre

कविता

Publisher

Shwetwarna Prakashan

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