‘लय की लहरों पर’ किरण सिंह का मुक्तक-संग्रह है। काव्य विधा में मुक्तक अपने कथ्य में स्पष्टता, प्रवाह, सरलता, स्वतंत्रता तथा गेयता की बदौलत काफी लोकप्रिय है। चूंकि इस विधा में कुछ ही पंक्तियों में एक अनुभूति, एक भाव और एक ही कल्पना का चित्रण स्पष्ट तौर पर किया जाता है तो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पाठक व श्रोता बिना दिमाग पर अधिक भार दिये कम समय में ही काव्य रस का भरपूर आनंद उठा लेते हैं। यही वजह है कि मुक्तक कवियों को अपने आकर्षण में बांधकर लिखने के लिए विवश कर देता है। पाठकों तथा श्रोताओं को जितना आनंद मुक्तक पढ़ने व सुनने में आता है उससे कहीं अधिक आनंद सिद्धहस्त कवियों को मुक्तक लिखने में आता है। क्योंकि वह अपने मन के भावों को पन्नों पर उकेर कर भावनाओं के भार से कुछ हद तक मुक्त हो जाता है, ठीक उसी तरह से जैसे कोई बात किसी से कहने के लिए मन मचलता रहता है और जब तक हम अपने अभिन्न से कह नहीं लेते तब तक चैन नहीं आता। किसी भी लेखक/कवि का अपने पाठकों श्रोताओं से एक बहुत प्यारा और गहरा रिश्ता जुड़ जाता है जो कि अभिन्न ही होता है इसलिए वह अपने पाठकों और श्रोताओं के सम्मुख प्रस्तुत कर संतुष्ट हो जाता है।
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