‘किसलय’ अनज कुमार पाठक का पहला यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें भारत के सत्रह विविध स्थलों की यात्राएँ अनुभव, रोमांच, आस्था और आत्मीयता के साथ दर्ज हुई हैं। इन यात्राओं में ग्यारह तीर्थाटन और छह पर्यटन पर केंद्रित हैं। लेखक ने केवल स्थानों का भ्रमण नहीं किया, बल्कि वहाँ के जीवन, प्रकृति, संस्कृति, भाषा, परंपराओं और लोगों को निकट से देखा और अनुभव किया है।
हर यात्रा अपने भीतर एक अलग संसार समेटे हुए है। कहीं हरिद्वार से गोमुख तक की कठिन और रोमांचकारी ट्रेकिंग है, तो कहीं काकीनाडा का सैन्य प्रशिक्षण और पैराशूट जंपिंग। दिल्ली की पहली यात्रा में संघर्ष और अप्रत्याशित आत्मीयता है, तो कामाख्या, चारधाम, वैष्णो देवी, जगन्नाथपुरी, अयोध्या, वृंदावन और राजगीर की यात्राओं में आस्था और आध्यात्मिक अनुभवों की गहरी छाप दिखाई देती है।
‘किसलय’ की विशेषता यह है कि इसमें यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को समझने और स्वयं को जानने की प्रक्रिया बन जाती है। सहज भाषा, जीवंत चित्रण और व्यक्तिगत अनुभवों के कारण यह यात्रा-वृत्तांत पाठक को घटनाओं के बीच उपस्थित होने का अनुभव कराता है और उसके भीतर स्वयं यात्रा पर निकलने की इच्छा जगाता है।



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