‘करुण पुकार’ कवयित्री रीना प्रेम दुबे का काव्य संकलन है, जो उनकी संवेदनशील लेखनी का शब्दायित रूप है। इ इस संकलन में गीत और गीतिका दो खंडों में हैं, जिनमें मुक्त छंद, विषय-विविधता, गेयता और लयात्मकता का समावेश है। माँ शारदा के नमन से शुरू यह संकलन प्रेम, विवशता, और जीवन के द्वंद्व को व्यक्त करता है। रचनाएँ जैसे ‘आर्द्र नयन से करती करुण पुकार’ और ‘हमने सृष्टि को जन्म दिया फिर उनसे ही तो हार गई’ पाठकों की संवेदनाओं से जुड़ती हैं। यह कृति रीना की काव्य-समझ और सृजनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
| Author | रीना प्रेम दुबे |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-49947-16-0 |
| Language | Hindi |
| Pages | 131 |
| Genre | कविता |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |



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