उर्वशी कर्णवाल का सद्य: प्रकाशित गीत संग्रह ‘कल्पनाओं से निकलकर’ प्रेम, भक्ति और यथार्थ की त्रिवेणी के रूप में हमारे सामने है। संग्रह के गीत जहाँ भावनात्मक उन्मेष को शब्दायित कर रहे हैं वहीं दार्शनिकता को भी ख़ुद में समेटने वाले हैं। उर्वशी जी के लिए प्रेम केवल सुखद कल्पना नहीं अपितु दुष्कर काँटों भरा मार्ग है जहाँ मनुष्य सत्य का अन्वेषण करता है। यह संग्रह प्रेम को आत्मिक शुद्धि और समर्पण दोनों ही भावों के रूप में प्रस्तुत करता है।
उर्वशी जी ने अपने गीतों में जीवन की नश्वरता, समय की निरंतर गति और मानव जीवन के अभिनयात्मक स्वरूप को भी अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उकेरा है।
| Author | उर्वशी कर्णवाल |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-81-998582-4-4 |
| Language | Hindi |
| Pages | 184 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | गीत |




Reviews
There are no reviews yet.