कबीर का चच्चा / शिल्पा वर्मा

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‘कबीर का चच्चा’ शिल्पा वर्मा जी का पहला व्यंग्य संग्रह है। छोटी उम्र में व्यंग्यकार का सामाजिक दायरा और कहन का तरीका बेहद समृद्ध है। इस संग्रह में उद्धरण क्षमता गज़ब की है जैसे परसाई जी या शरद जोशी या श्रीलाल शुक्ल में है, कुछ इस पर आपत्ति जता सकते हैं, पर हाथ कंगन को आरसी क्या, बानगी देखें- पार्टी के हित में सबका हित, दुर्बल वर्तमान माने युवा, भेड़ों का मसीहा, कबीर का दोहा पढ़कर खुद को कबीर समझना, बेटी की बिदाई पर छुपकर रोते बाप के कलेजे की तरह, दीमक लगे पेड़ जड़ से हिलते हैं, इस तरह के बहुतेरे उदाहरण दिए जा सकते हैं।

Author

शिल्पा वर्मा

Format

Paperback

ISBN

978-93-49947-91-7

Language

Hindi

Pages

104

Genre

व्यंग्य

Publisher

Shwetwarna Prakashan

3 reviews for कबीर का चच्चा / शिल्पा वर्मा

  1. Rated 5 out of 5

    Rahul Verma

    व्यंग्य विधा में शानदार मारक पुस्तक। शिल्पा वर्मा जी को हार्दिक बधाई।

  2. Rated 5 out of 5

    Nikita

    Very nice satire book.

  3. Rated 5 out of 5

    अभिषेक यादव

    ‘कबीर का चच्चा’: एक अनोखा व्यंग्य संग्रह
    यह किताब शिल्पा वर्मा जी द्वारा लिखित व्यंग्य निबंधों का एक अद्भुत संग्रह है। अपनी तीखी कलम और हास्य-व्यंग्य शैली के लिए जानी जाने वाली लेखिका ने समाज और राजनीति से जुड़े मुद्दों पर बेहतरीन टिप्पणियां की हैं।
    प्रमुख बातें:
    व्यंग्य से भरपूर: किताब में हास्य और व्यंग्य का अद्भुत मिश्रण है, जो पाठकों को सोचने पर मजबूर करता है।
    सामाजिक कटाक्ष: इसमें दिए गए निबंध आज के समय के सामाजिक और राजनीतिक हालात को दर्शाते हैं।
    सरल भाषा: लेखिका ने अपनी बात को सीधे और सरल तरीके से लिखा है, जिससे यह किताब हर किसी के लिए पठनीय है।
    अगर आप ऐसी किताबें पढ़ना पसंद करते हैं जो आपको हंसाने के साथ-साथ सोचने का मौका भी देती हैं, तो ‘कबीर का चच्चा’ एक बेहतरीन विकल्प है। यह पुस्तक निश्चित रूप से आपके स्नेह और आशीर्वाद की हकदार है।

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