हिन्दी ग़ज़ल : परम्परा से प्रयोग तक डॉ. अविनाश भारती

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‘हिन्दी ग़ज़ल परम्परा से प्रयोग तक’ हिन्दी ग़ज़ल की ऐतिहासिक यात्रा, विकास-क्रम और समकालीन स्वरूप का गहन आलोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है। अमीर ख़ुसरो से लेकर आज के युवा ग़ज़लकारों तक, लेखक ने परम्परा और प्रयोग के बीच ग़ज़ल की बदलती संवेदनाओं, शिल्प और कथ्य को सुस्पष्ट रूप में रेखांकित किया है।
पुस्तक में समकालीन हिन्दी ग़ज़ल के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सरोकारों पर विशेष ध्यान दिया गया है। स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, किसान जीवन, पहचान की राजनीति और मानवीय संघर्ष जैसे विषयों को ग़ज़ल की दृष्टि से समझने का प्रयास इसे विशिष्ट बनाता है। लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि आज की ग़ज़ल केवल प्रेम और विरह की अभिव्यक्ति नहीं रही, बल्कि वह समय की सच्चाइयों से संवाद करती एक सशक्त साहित्यिक विधा बन चुकी है।
शोधार्थियों, ग़ज़लकारों और साहित्य-प्रेमियों के लिए यह पुस्तक हिन्दी ग़ज़ल की परम्परा को समझने और उसके नवाचारों से जुड़ने का एक प्रामाणिक, समृद्ध और मार्गदर्शक ग्रंथ है।

Author

अविनाश भारती

Format

Paperback

ISBN

978-93-47306-99-0

Language

Hindi

Pages

364

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

आलोचना

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