ओमप्रकाश यती का नाम हिंदी ग़ज़ल के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रचनाकार के रूप में लिया जाता है। वास्तविकता और यथार्थ के धरातल से उपजी उनकी ग़ज़लों ने हिन्दी ग़ज़ल को निरंतर समृद्ध किया है। इतना ही नहीं, ‘गद्यं कवीनां निकषं वदन्ति’ को सही सिद्ध करते हुए वे पिछले कुछ वर्षों से हिन्दी ग़ज़ल की आलोचना के लिए भी कार्य कर रहे हैं।
हिन्दी ग़ज़ल की आलोचना को नवनिकष पर प्रस्तुत करते हुए वे व्यवस्थित और संकल्पित नज़र आते हैं। संग्रहों की समीक्षाओं, आलेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से उन्होंने हिन्दी ग़ज़ल के मानकों और कसौटियों की प्रतिपुष्टि की है। वे समसामयिक सृजन को आधार प्रदान करने और सृजन की उपादेयता की दिशा में भी प्रवृत्त दिखाई देते हैं।
अपने विस्तृत अनुभव के साथ ग़ज़ल विधा में सृजनरत यती जी जब आलोचक की भूमिका निभाते हैं तो रचना प्रकिया, उसके अंतर्भाव और नवाचार के साथ उसकी कमियों को भी इंगित करना नहीं भूलते हैं। अपने नीर-क्षीर विवेक के साथ कम शब्दों में गूढ़ता तक पहुँचना उन्हें आता है।
– शारदा सुमन
संयुक्त निदेशक, कविता कोश




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