‘गंडक की बेटी’ ग्रामीण स्मृतियों, लोक-संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और उत्तर बिहार की मिट्टी की सुगंध से रचा गया एक अनूठा काव्य-संग्रह है। लेखिका अनिता सिंह ने इस पुस्तक में अपने गाँव, परिवार, लोकजीवन, त्योहारों, रिश्तों, स्त्रियों, लोकगीतों और सांस्कृतिक विरासत को अत्यंत आत्मीयता और संवेदनशीलता के साथ शब्दों में पिरोया है।
यह पुस्तक केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि उत्तर बिहार की जीवित लोक-स्मृतियों का दस्तावेज़ है। ‘ठाकुरवाड़ी’, ‘मेरा गाँव’, ‘छठ’, ‘सामा चकेवा’, ‘दादी’, ‘माँ’, ‘बाबा साहेब’ जैसे प्रसंग पाठकों को भारतीय ग्रामीण जीवन की उस दुनिया में ले जाते हैं जहाँ रिश्तों की गर्माहट, लोक-आस्था और सामुदायिक जीवन आज भी साँस लेते हैं।
लेखिका ने गंडक और कदाने नदी के इर्द-गिर्द विकसित लोकजीवन, लोकभाषा, परंपराओं और स्त्री-अनुभवों को अत्यंत प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया है। यह कृति उन पाठकों के लिए विशेष महत्त्व रखती है जो भारतीय गाँव, लोक-संस्कृति, संस्मरणात्मक लेखन और आंचलिक साहित्य में रुचि रखते हैं।
यह पुस्तक पाठकों को अपनी जड़ों, मिट्टी और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाली एक मार्मिक साहित्यिक यात्रा पर ले जाती है।




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