अंजना वर्मा का कहानी-संग्रह ‘एक था कुआँ’ जीवन के परिचित दृश्यों में छिपी पीड़ाओं, आकांक्षाओं और आत्मीयता के सूक्ष्म सूत्रों को सामने लाता है। संग्रह की पन्द्रह कहानियों में स्त्री के स्वाभिमान और संघर्ष, पुत्र की चाह से उपजती संवेदनहीनता, पारिवारिक सम्बन्धों की उलझनें, वृद्धावस्था का अकेलापन तथा बदलते समाज में मनुष्यता की तलाश विविध रूपों में व्यक्त हुई है। शीर्षक कहानी का कुआँ सामूहिक जीवन, आजीविका और लोकस्मृतियों का ऐसा केन्द्र है, जिसका मिटना विकास की चमक के पीछे छूटते संसार की कसक जगा देता है। लेखिका की संवेदना मनुष्य से आगे पशु-पक्षियों तक पहुँचती है और स्नेह, साहचर्य तथा स्वतंत्रता की आकांक्षा को व्यापक अर्थ देती है। सहज भाषा, सजीव परिवेश और पात्रों के अन्तर्मन में उतरती कथादृष्टि इन कहानियों को आत्मीय बनाती है। रोज़मर्रा की घटनाओं से उभरते इनके प्रश्न पाठक को अपने सम्बन्धों, सामाजिक धारणाओं और व्यवहार के प्रति सजग करते हैं।
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| Author | अंजना वर्मा |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-81-68494-20-6 |
| Language | Hindi |
| Pages | 160 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | कविता, कहानी |
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