दर्द जीता हूँ / ब्रह्म भारद्वाज ‘हशमत’

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दर्द उस अहसास का नाम है, जो किसी भी रचनाकार के लिए लेखन उपकरण का कार्य करता है। दर्द वह पूँजी है, जो लेखक को आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। दर्द वहीं उपस्थित होता है, जहाँ संवेदना होती है। हशमत भारद्वाज साहब इस दौलत से मालामाल हैं। यही कारण है कि उनके शेरों में जहाँ समर्पित प्रेम की भावना पाई जाती है, वहीं उनका शृंगार अध्यात्म की ऊँचाइयाँ छूता प्रतीत होता है। उन्होंने अपनी ग़ज़लों में परंपराओं के साथ-साथ नवीनता का प्रयोग बड़ी ख़ूबसूरती के साथ किया है।
उनके शेरों में जहाँ देश, समाज, परिवार, राजनीति, सभ्यता, संस्कृति आदि विषय पाए जाते हैं, वहीं प्रेम की विभिन्न स्थितियों का चित्रण भी मिलता है। उनका मानना है कि प्रेम जीवन का अहम अंग है। वह प्रत्येक विषय का वर्णन बड़ी ईमानदारी के साथ करते दिखाई देते हैं। शेरों में भाषा की शालीनता के साथ-साथ नवीन बिंब मिलते हैं।

– डा. कृष्णकुमार ‘नाज़’
9/3, लक्ष्मीविहार, हिमगिरि कालोनी, मुरादाबाद (उ.प्र.

Author

ब्रह्म भारद्वाज ‘हशमत’

Format

Hardcover

ISBN

978-81-998582-2-0

Language

Hindi

Pages

144

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

ग़ज़ल

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