डॉ. मंजुलता श्रीवास्तव जी एक ऐसी समर्थ बाल रचनाकार हैं, जिनकी रचनाएँ बच्चों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें संस्कारवान एवं जागरूक नागरिक बनाने का भी कार्य करती रही हैं। मंजुलता श्रीवास्तव जी का संग्रह ‘चुन्नू-मुन्नू की कुण्डलियाँ’ इस बात का परिचायक है कि कवयित्री नवोन्मेषी प्रयोगधर्मी रचनाकार हैं। इसीलिए आपने बालमन की अभिव्यक्ति के लिए कुंडलिया छंद को माध्यम के रूप में स्वीकार किया और सशक्त, भावप्रवण एवं बालमनोविज्ञान के अनुरूप छंद रचकर बाल साहित्य की श्रीवृद्धि करने का श्लाघनीय प्रयास किया है।
– डॉ. बिपिन पाण्डेय




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