बोलो न पापा / डॉ. अलका वर्मा

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डॉ. वर्मा की लेखनी में सरलता और सजीवता के साथ गहन भावनात्मकता है। हर कहानी एक दर्पण की तरह है, जो हमारे समाज की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करती है। लेखिका ने बड़ी कुशलता से ऐसे मुद्दों को उठाया है, जो न केवल प्रासंगिक हैं, बल्कि पाठकों को सोचने और बदलने की प्रेरणा देते हैं।
यह संग्रह केवल साहित्य का हिस्सा नहीं, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा है। यह उन पाठकों के लिए है, जो शब्दों के पीछे छिपे भावों को महसूस कर सकते हैं और कहानियों में अपना अक्स देख सकते हैं। यह पुस्तक जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों को बड़े आयाम देती है और यह विश्वास दिलाती है कि हर कहानी सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है। पाठक इस संग्रह को पढ़ते हुए न केवल कहानियों का आनंद लेंगे, बल्कि उनमें जीवन के अनकहे और अनसुने पहलुओं को खोजने का अनुभव भी करेंगे। यह पुस्तक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों की मिसाल है।

-डॉ. रंजन कुमार

Author

अलका वर्मा

Format

Paperback

ISBN

978-93-49947-82-5

Language

Hindi

Pages

104

Genre

लघुकथा

Publisher

Shwetwarna Prakashan

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