इस पुस्तक में परिवार, संघर्ष, मातृत्व, स्त्री-जीवन, भय, अकेलापन, सामाजिक विसंगतियाँ, गाँव की स्मृतियाँ, यात्राएँ, पशु-पक्षियों के प्रति आत्मीय लगाव और कोरोना काल के अनुभवों के साथ जीवन के अनेक अनदेखे-अनकहे प्रसंग सामने आते हैं। ‘अविश्वसनीय किंतु सत्य’, ‘खरगोश’, ‘कोरोना पीड़ित’, ‘मेरी पूसी’, ‘अमानवीय कृत्य’, ‘ख़ौफ़’ और ‘कैंसर यात्रा : हार या जीत’ जैसे संस्मरण निजी अनुभवों से आगे बढ़कर हमारे समय और समाज की तस्वीर बन जाते हैं।
लेखिका की भाषा सहज, आत्मीय और जीवन की स्वाभाविक ऊष्मा से भरी है। यहाँ कोई कृत्रिम आडंबर नहीं है; घटनाएँ उसी मानवीय ताप के साथ उपस्थित हैं, जिसमें वे जिए गए जीवन का रूप लेकर सामने आती हैं।
‘अतीत के झरोखे’ पाठक को केवल अतीत की ओर नहीं ले जाती, बल्कि उसे अपनी ही स्मृतियों, रिश्तों और जीवन-अनुभवों से संवाद करने के लिए प्रेरित करती है।
| Author | अलका वर्मा |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-81-68494-00-8 |
| Language | Hindi |
| Pages | 102 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | संस्मरण |



Reviews
There are no reviews yet.