कवयित्री किरण सिंह कुंडलियों के माध्यम से गहरी संवेदना जगाती हैं। उन्होंने इस छंद को बखूबी साध लिया है और अत्यंत सहज ढंग से गंभीर बात कहने की रचनात्मक दक्षता उन्हें हासिल हो चुकी है। फलतः जिस विषय को वह उठाती हैं, उसके मर्म का स्पर्श किए बगैर नहीं रहतीं और उनके दिल से निकली हुई आवाज सीधे पाठक के दिल में जा उतरती है। संग्रह का शीर्षक ‘अंतर्ध्वनि किरण की’ उन्होंने यों ही नहीं रखा है। चाहे ‘अंतः के स्वर’ हों अथवा अंतर्ध्वनि – उनका आशय आत्म साक्षात्कार से है। दूसरे शब्दों में, उनकी अंतरात्मा की आवाज है यह।
| Author | Kiran Singh |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-49136-70-0 |
| Language | Hindi |
| Pages | 104 |
| Genre | कुण्डलिया |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |



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