‘आंतरिक सज्जा’ डॉ. प्रीति धनखड़ द्वारा लिखित एक उपयोगी, पाठ्यक्रमानुकूल एवं व्यावहारिक पुस्तक है, जो विशेष रूप से बी.ए. प्रथम वर्ष की छात्राओं तथा Interior Decoration/Home Science से जुड़े विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। पुस्तक के अध्याय इंटीरियर डेकोरेशन के 4-क्रेडिट पाठ्यक्रम के अनुरूप सरल भाषा में संयोजित किए गए हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी भी विषय को सहजता से समझ सकें। यह पुस्तक केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित न रहकर घर और कार्यस्थल को सुन्दर, सुव्यवस्थित, उपयोगी और व्यक्तित्व-अनुकूल बनाने की व्यावहारिक समझ भी विकसित करती है।
पुस्तक में आंतरिक सजावट के उद्देश्य, कला के तत्त्व—रेखा, आकार, रंग, बनावट, रूप, नमूना एवं स्थान—तथा डिजाइन के सिद्धान्त—हार्मनी, संतुलन, अनुपात, लय और आकर्षण-केंद्र का क्रमबद्ध अध्ययन कराया गया है। इसके साथ ही प्रकाश-व्यवस्था, औपचारिक एवं अनौपचारिक टेबल-सेटिंग, भारतीय एवं बफे शैली, फर्नीचर के प्रकार एवं उसकी व्यवस्था, रसोई, पुष्प-सज्जा, पर्दे, कुशन, अपहोल्स्ट्री, दीवार एवं खिड़की-सज्जा तथा फ्लोर कवरिंग्स जैसे व्यावहारिक विषय भी विस्तार से सम्मिलित हैं।
पुस्तक की एक बड़ी विशेषता इसकी चित्रात्मक एवं प्रयोगधर्मी प्रस्तुति है। रंग, टेक्सचर, प्रकाश, फर्नीचर, कालीन, पर्दे और अन्य सजावटी वस्तुओं के उचित चयन से किस प्रकार किसी साधारण स्थान को सौन्दर्यपूर्ण एवं कार्यक्षम बनाया जा सकता है, इसे सहज ढंग से समझाया गया है। पुस्तक यह भी स्पष्ट करती है कि कला के तत्त्वों और सिद्धान्तों का बुद्धिमत्तापूर्ण प्रयोग ऐसी गृह-व्यवस्था निर्मित करता है, जो उपयोगिता और सौन्दर्य—दोनों की दृष्टि से प्रभावी हो।
इस प्रकार Home Science, Interior Decoration, Interior Designing तथा Home Furnishing से संबंधित स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए ‘आंतरिक सज्जा’ एक उपयोगी पाठ्यपुस्तक और संदर्भ-ग्रंथ है। सरल भाषा, व्यवस्थित पाठ्यक्रम, उदाहरणों एवं चित्रों की पर्याप्त उपस्थिति तथा दैनिक जीवन में सीधे लागू होने वाली सामग्री इसे विद्यार्थियों के साथ-साथ गृह-सज्जा में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों और इस क्षेत्र में कौशल अथवा स्वरोजगार विकसित करने के इच्छुक शिक्षार्थियों के लिए भी उपयोगी बनाती है।



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