‘हिन्दी बालसाहित्य : गति, प्रगति और संभावनाएँ’ हिन्दी बालसाहित्य की विकास-यात्रा का एक महत्त्वपूर्ण, प्रामाणिक और शोधपरक दस्तावेज़ है। वरिष्ठ बालसाहित्यकार एवं समीक्षक प्रो. सुरेन्द्र विक्रम ने इस कृति में हिन्दी बालसाहित्य की परम्परा, उसके विकासक्रम, समकालीन स्थिति तथा भविष्य की संभावनाओं का व्यापक और तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक केवल इतिहास का पुनर्पाठ नहीं करती, बल्कि बालसाहित्य से जुड़े अनेक ज्वलन्त प्रश्नों, चुनौतियों, उपलब्धियों और उपेक्षित पक्षों पर भी गंभीर विमर्श करती है।
पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें हिन्दी बालसाहित्य के इतिहास के साथ-साथ वर्ष 2022, 2023, 2024 और 2025 में प्रकाशित बालसाहित्य का क्रमबद्ध मूल्यांकन भी प्रस्तुत किया गया है। नासिरा शर्मा, रमाकांत शर्मा ‘उद्भ्रांत’, डॉ. मधु पंत, प्रो. उषा यादव, कमलेश भट्ट ‘कमल’, हरीश गोयल, प्रो. अरविन्द दुबे, डॉ. अजय जनमेजय सहित अनेक महत्त्वपूर्ण रचनाकारों के बालसाहित्य का विवेचन इस ग्रंथ को और अधिक उपयोगी बनाता है। साथ ही बालपत्रकारिता, बाल-पत्रिकाओं तथा समकालीन बालसाहित्य की प्रवृत्तियों पर भी लेखक की दृष्टि समान रूप से सजग और संतुलित है।
यह कृति बालसाहित्य के अध्येताओं, शोधार्थियों, अध्यापकों, समीक्षकों तथा रचनाकारों के लिए एक विश्वसनीय संदर्भ-ग्रंथ के रूप में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। अपने तथ्य-संग्रह, निष्पक्ष मूल्यांकन, व्यापक दृष्टि और आलोचनात्मक विवेक के कारण यह पुस्तक हिन्दी बालसाहित्य के वर्तमान परिदृश्य को समझने और उसके भविष्य की दिशा निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हिन्दी बालसाहित्य के गंभीर अध्ययन के लिए यह पुस्तक निस्संदेह संग्रहणीय और अनिवार्य कृति है।



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