अंकुश अनेजा का यह पहला काव्य-संग्रह ‘ग़म का प्याला’ सिर्फ़ कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि एक ऐसे भावुक हृदय की आत्मकथा है जिसने प्रेम को पूरे समर्पण के साथ जिया है। इस संग्रह की सबसे बड़ी ख़ूबसूरती इसकी बेबाक सहजता और आत्मीयता है। कवि यहाँ शब्दों का कोई आडंबर या जटिल प्रतीक नहीं रचते, बल्कि हमारे और आपके रोज़मर्रा के जीवन, अधूरी हसरतों और संघर्षों को अपनी लेखनी का आधार बनाते हैं।
यह काव्य-संग्रह हिंदी और उर्दू की रवानगी का एक संगम है। इसकी हर एक पंक्ति में विरह की वेदना तो है, मगर वह वेदना सिर्फ़ कवि की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं रह जाती, वह एक सामूहिक अनुभव में तब्दील हो जाती है। यदि आपने कभी मोहब्बत की पाकीज़गी, यादों के बोझ और जीवन के दार्शनिक उतार-चढ़ाव को महसूस किया है, तो ‘ग़म का प्याला’ की ये नज़्में सीधे आपके दिल को दस्तक देंगी।
| Author | अंकुश अनेजा |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-81-69342-31-5 |
| Language | Hindi |
| Pages | 80 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | कविता |



Reviews
There are no reviews yet.