‘मन का आँगन’ रचनाकार राकेश रमण ‘रार’ द्वारा रचित एक उत्कृष्ट और भावपूर्ण कविता-संग्रह है। इस पुस्तक में कुल 140 कविताएँ संकलित हैं, जो मानव जीवन के अंतर्दर्शन और रागात्मक अनुभूतियों की सहज अभिव्यक्ति हैं। यह संग्रह मानवतावादी शाश्वत तत्वों, सामाजिक समरसता और मनुष्य के उदात्त सद्गुणों को अपनी कविताओं में स्थापित करता है। पुस्तक की भूमिका में आचार्य हरे राम त्रिपाठी ‘चेतन’ स्पष्ट करते हैं कि कवि ने अपनी भाषा की अंदरूनी सरलता और लोक मानस की रचनात्मक आत्मीयता के माध्यम से पाठकों के समक्ष एक ‘प्राण राग’ का सृजन किया है। लेखक के अनुसार, इन कविताओं का उद्देश्य पाठकों की वैचारिक संवेदनाओं को उद्वेलित कर उन्हें एक विशिष्ट साहित्यिक स्वाद प्रदान करना है। गाँव की बदलती सभ्यता (नव-गाँव), जीवन के यथार्थ (सुख-दुःख), प्रकृति के अनूठे रूप (वसंत, हिमालय) और मानव मन की असीम गहराइयों जैसे विविध विषयों पर लिखी गई ये कविताएँ पाठकों को एक वैचारिक यात्रा पर ले जाती हैं।
‘मन का आँगन’ रचनाकार राकेश रमण ‘रार’ द्वारा रचित एक उत्कृष्ट और भावपूर्ण कविता-संग्रह है। इस पुस्तक में कुल 140 कविताएँ संकलित हैं, जो मानव जीवन के अंतर्दर्शन और रागात्मक अनुभूतियों की सहज अभिव्यक्ति हैं। यह संग्रह मानवतावादी शाश्वत तत्वों, सामाजिक समरसता और मनुष्य के उदात्त सद्गुणों को अपनी कविताओं में स्थापित करता है। पुस्तक की भूमिका में आचार्य हरे राम त्रिपाठी ‘चेतन’ स्पष्ट करते हैं कि कवि ने अपनी भाषा की अंदरूनी सरलता और लोक मानस की रचनात्मक आत्मीयता के माध्यम से पाठकों के समक्ष एक ‘प्राण राग’ का सृजन किया है। लेखक के अनुसार, इन कविताओं का उद्देश्य पाठकों की वैचारिक संवेदनाओं को उद्वेलित कर उन्हें एक विशिष्ट साहित्यिक स्वाद प्रदान करना है। गाँव की बदलती सभ्यता (नव-गाँव), जीवन के यथार्थ (सुख-दुःख), प्रकृति के अनूठे रूप (वसंत, हिमालय) और मानव मन की असीम गहराइयों जैसे विविध विषयों पर लिखी गई ये कविताएँ पाठकों को एक वैचारिक यात्रा पर ले जाती हैं।




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