स्मृतियों के झरोखे से झाँकती यह कृति मात्र एक यात्रा संस्मरण नहीं, बल्कि जीवन के उन अनछुए पहलुओं का जीवंत दस्तावेज़ है, जहाँ उत्साह, रोमांच और आत्मीयता का संगम होता है। लेखक राकेश रमण ‘रार’ ने बड़ी ही सहजता से अपनी दो विशिष्ट यात्राओं को इस पुस्तक में पिरोया है।
पहली यात्रा ‘पगली यात्रा’ है, जो सन् 1988 के दौर की युवा तरुणाई की कहानी है। चार मित्र बिना किसी पूर्व योजना के, केवल रोमांच की खोज में झारखंड के जंगलों, पहाड़ों और नदियों के बीच निकल पड़ते हैं। यह संस्मरण हमें उस दौर में ले जाता है जहाँ सेल्फी का शोर नहीं था, बल्कि प्रकृति के साथ एकात्म होने का मौन संवाद था।
वहीं दूसरी यात्रा ‘हिमखंड की वादियों में’ एक पारिवारिक संस्मरण है, जो लद्दाख और कश्मीर की बर्फीली चोटियों और घाटियों के बीच आधुनिक सुविधाओं और बच्चों के स्नेहिल ‘सरप्राइज’ से सजी है। लेह के शांति स्तूप से लेकर पैंगोंग झील की नीलिमा तक, यह यात्रा विकास और बदलाव के बीच मानवीय रिश्तों की ऊष्मा को रेखांकित करती है।
सरल भाषा और भावपूर्ण वर्णन के साथ यह पुस्तक हर उस पाठक के लिए है जो स्मृतियों के गलियारों में टहलना पसंद करता है।
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| Author | राकेश रमण 'रार' |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-81-69342-62-9 |
| Language | Hindi |
| Pages | 152 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | यात्रा-संस्मरण |




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