सत्येन्द्र तिवारी जी के गीत और नवगीत संवेदना की उस धरती से उपजते हैं, जहाँ व्यक्ति का निजी दर्द समष्टि की पीड़ा से जुड़कर व्यापक मानवीय सरोकारों का रूप ले लेता है। बदलते समय की अंधी दौड़, पश्चिमी प्रभाव, राजनीतिक विसंगतियाँ, वृद्धों की उपेक्षा, नैतिक अवमूल्यन और आम आदमी की संघर्षमय दिनचर्या; इन सबके बीच सत्येन्द्र जी का स्वर कहीं प्रतिरोध बनकर उभरता है तो कहीं करुणा और करुणाशीलता का मधुर आमंत्रण देता है।
इस संग्रह की विशेषता इसकी सहज, लयात्मक और गेय भाषा है। गीतों में जीवन-दर्शन है, रिश्तों की ऊष्मा है, प्रेम की तरलता है और समाज को जाग्रत करने का सजग स्वर भी। यहाँ वेदना है, पर निराशा नहीं; प्रश्न हैं, पर समाधान की आकांक्षा भी; विघटन है, पर समरसता का स्वप्न भी।
| Author | सत्येन्द्र तिवारी |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-93-49947-30-6 |
| Language | Hindi |
| Pages | 136 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | नवगीत |




Reviews
There are no reviews yet.