रमेश ‘कँवल’ ग़ज़ल व्योम के देदीप्यमान सितारे हैं। वे भावनाओं की शस्य श्यामला वसुंधरा से जुड़े रहकर अपनी चमक बिखेरने में विश्वास करते हैं। उनकी ग़ज़लों के 6 खूबसूरत ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित ग़जलकारों के 6 ग़ज़ल संग्रह का सम्पादन भी किया है। जहाँ ‘एक रुकनी अनूठी ग़ज़लें’ ग़ज़ल के क्षेत्र में उनकी प्रयोगधर्मिता का दस्तावेज़ है वहीं ‘वंदन! शुभ अभिवंदन!’ सनातन आस्थाओं में उनके दृढ़ संकल्प को उजागर करता विभिन्न देव शक्तियों को निवेदित भक्ति भावनाओं अल्बम है।
रमेश ‘कँवल’ की प्रकाशित किताबों में विभिन्न कला पारखी विद्वानों ने उनके काव्य सौन्दर्य पर अपनी कृपा वृष्टि की है। उनके काव्य सौष्ठव की प्रशंसा में लिखी गई कमनीय विवेचना एवं क्रमबद्ध आलोचनात्मक आलेख ग़ज़लों के प्रगति मानक परिवर्तनशील संसार में रमेश ‘कँवल’ के स्थान का निर्धारण और उनकी ग़ज़लीयत श्रेष्ठता का पता देते हैं। यही आलेख इस पुस्तक में शामिल हैं।
कुमार अभिषेक




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