चमकें सूरज जैसा (Chamkein Sooraj Jaisa / Lal Devendra Kumar Shrivastava)

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हिन्दी साहित्य के व्यापक परिदृश्य में बाल साहित्य का महत्वपूर्ण स्थान है। यह भविष्य गढ़ने वाले नौनिहालों को दिशा-निर्देशित करता है। इसमें साहित्यकारों को एक तरफ बालमन के अनुरूप सरल मनोरंजक और लयात्मक प्रस्तुति की तरफ ध्यान देना होता है तो दूसरी तरफ कोमल बालकमन को कल्पनाशील व जिज्ञासु बनने के लिए प्रेरित भी करना पड़ता है। लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव जी जो कि मूल रूप से शिक्षक हैं, इस बात को भली भाँति समझते हैं। उनकी रचनाओं में शिक्षा, संस्कार और जीवन मूल्यों का सहज समावेश मिलता है। अपने अनुभव, संवेदना और शिक्षकीय दृष्टि से प्रकृति, पर्यावरण, ग्राम्य जीवन, शिक्षा व खेल के महत्व, देशभक्ति व राष्ट्रीयता की भावना तथा बालमन की कल्पनाओं को उन्होंने बखूबी प्रस्तुत किया है। उनकी बालकविताओं में साहित्य और मनोविज्ञान का संतुलन तो दिखाई देता ही है उपदेशात्मकता और समकालीन प्रासंगिकता भी स्थान पाती है।

उनकी पुस्तक का शीर्षक ‘चमकें सूरज जैसा’ उनकी कविताओं के अनुरूप ही आशा, ऊर्जा और प्रेरणा से संपृक्त है।

– गरिमा सक्सेना

Author

लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव

Format

Hardcover

ISBN

978-93-49947-25-2

Language

Hindi

Pages

120

Genre

बाल कविता

Publisher

Shwetwarna Prakashan

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