कल्पना शर्मा एक युवा ग़ज़लकार हैं। इस नाते से भी कि वे नई पीढ़ी के सोच से परिचित हैं और उनकी अभिव्यक्ति की सीधी पहुँच नई पीढ़ी की नस तक है। यहाँ बोझिल विचारों के लिए कोई जगह नहीं है। यहाँ कहीं-कहीं परंपरावादी ग़ज़लों का सुरूर अवश्य है, लेकिन रंग हर तरफ़ आज का है।
ये ग़ज़लें अपने अल्हड़पन से, अपनी छेड़ से रोमांचित करने में कामयाब हैं। इनमें अपने लहजे से चकित कर देने का सामर्थ्य है। यहाँ ग़ज़लकार परिपक्वता और आभिजात्य के आग्रह के मोह पर अपनी भाषा के लालित्य को वरीयता देता है। शब्दावली में बोलियों वाला अपनापन लगता है। शास्त्रीयता की रस्सी पर चलते हुए अपनी नैसर्गिकता का संतुलन क़ायम रखना बड़ी बात है। ऐसी ही कुछ बड़ी बातें कल्पना शर्मा की शायरी में हैं।
– विजय कुमार स्वर्णकार
| Author | कल्पना |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-49947-76-4 |
| Language | Hindi |
| Pages | 112 |
| Genre | ग़ज़ल |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |



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