‘ज़िंदगी कामयाब हो जाए’ बाबा बैद्यनाथ झा का नवीनतम ग़ज़ल-संग्रह है। यह संग्रह उनकी संवेदनात्मक यात्रा का ऐसा प्रमाण है, जिसमें मनुष्य के निजी अनुभव, सामाजिक यथार्थ, प्रेम-विरह, नैतिक-द्वंद्व और आत्ममंथन एक साथ प्रस्तुत हुए हैं। इस संग्रह की ग़ज़लें जीवन को किसी आदर्शवादी ऊँचाई से नहीं, बल्कि ज़मीन पर खड़े होकर देखने वाली हैं। इनमें इच्छाएँ हैं, असफलताएँ हैं, समझौते हैं और फिर भी आगे बढ़ने की ज़िद है। इसी ज़िद का नाम यहाँ ‘कामयाबी’ है; जो केवल बाहरी उपलब्धि नहीं, बल्कि भीतर की तसल्ली और सही दिशा की पहचान भी है।
| Author | बाबा बैद्यनाथ झा |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-49947-21-4 |
| Language | Hindi |
| Pages | 168 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | ग़ज़ल |



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