योग वस्तुतः मानव जीवन के सभी आयामों जैसे शारीरिक, मानसिक, भौतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, धार्मिक में विकास कर उसके जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन लाता है और उनके, उनके परिवार के, समाज के और अंततः राष्ट्र के विकास में अतुलनीय योगदान देता है। वर्तमान में योग का अर्थ वस्तुतः केवल आसन और प्राणायाम से लिया जाता है। जबकि यह तो इसके शुरुआती चरण है इसका असली कार्य तो शरीर को सुदृढ़ करना और उससे भी अधिक मानसिक रूप से शक्तिशाली बनाना है ताकि वह किन्हीं भी परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाये रखकर मनोबल को उच्चतम शिखर पर रखे और निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करे। जीवन में आने वाली व्याधियों तथा बाधाओं से योग न सिर्फ बचाता है अपितु किसी भी कार्य को उत्कृष्ट ढंग से करने के लिए एकाग्र करने का कौशल प्रदान करता है।
श्री कमल कान्त शर्मा द्वारा रचित यह ‘योग-दोहावली’ जनमानस के अज्ञानावरण को हटाकर उसे स्वार्थ से परमार्थपरक, देह से विदेहपरक एवं आत्मा से परमात्मापरक जीवन दृष्टि देकर सर्वविध कल्याण करने वाली है।
Author | कमल कान्त शर्मा |
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Format | Paperback |
ISBN | 978-93-49136-53-3 |
Language | Hindi |
Pages | 112 |
Publisher | Shwetwarna Prakashan |
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