या देवी सर्वभूतेषु… माँ दुर्गा की महिमा, शक्ति और करुणा का काव्यात्मक स्तवन है, जिसमें दुर्गा सप्तशती में वर्णित सम्पूर्ण कथा को हिन्दी के सुगम, लयबद्ध और मनोहारी कुण्डलिया छंद में प्रस्तुत किया गया है। संस्कृत के 700 श्लोकों के भावार्थ को छंदबद्ध रूप देकर यह कृति श्रद्धालु पाठकों के लिए पाठ, साधना और अनुभूति का अनुपम माध्यम बन गयी है।
इस पुस्तक में बीजमंत्र, दुर्गा कवच, अर्गलास्तोत्र, कीलक, चण्डीशाप विमोचन, उत्कीलन मंत्र तथा तीनों चरित्रों की कथाएँ समाहित हैं, जिनमें माँ दुर्गा के शौर्य, पराक्रम, करुणा और लोककल्याणकारी स्वरूप का भावपूर्ण चित्रण मिलता है। यह काव्य अच्छाई की बुराई पर विजय, आत्मबल, भक्ति और चेतना के जागरण का संदेश देने वाला है।
नवरात्र, दुर्गा पूजा एवं दैनिक साधना के लिए यह पुस्तक भक्तों, साधकों और साहित्यप्रेमियों के लिए समान रूप से उपयोगी है। श्रद्धा, संस्कार और साहित्य का यह सुंदर संगम पाठक को आध्यात्मिक आनंद और आंतरिक शक्ति से भर देने वाला है।
| Author | ऋता शेखर ‘मधु’ |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-47306-44-0 |
| Language | Hindi |
| Pages | 100 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | गीत |



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