विस्थापित / ज्ञानप्रकाश विवेक

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विस्थापित विभाजन की त्रासदी, मानवीय पीड़ा और टूटे हुए सपनों की मार्मिक कथा है। यह उपन्यास उन लोगों की व्यथा को स्वर देता है, जिन्हें अपनी ज़मीन, घर, पहचान और संबंधों से बेदखल होकर अनजान रास्तों पर भटकना पड़ा। रेल के डिब्बों में सिमटी साँसें, डर, भूख, मौन और असहायता; इन सबका सजीव चित्रण इस रचना को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली बनाता है।
कहानी केवल भौतिक विस्थापन की नहीं, बल्कि मन, स्मृति और आत्मा के भीतर घटते विस्थापन की भी है। लेखक ने साधारण जन के जीवन-संघर्ष, स्त्रियों की पीड़ा, रिश्तों की टूटन और अस्तित्व की तलाश को गहन मानवीय दृष्टि से उकेरा है। भाषा सहज, भावनात्मक और प्रवाहपूर्ण है, जो पाठक को कथा के भीतर खींच लेती है।
विस्थापित इतिहास का दस्तावेज़ भर नहीं, बल्कि करुणा, सहानुभूति और मानवता का साहित्यिक साक्ष्य है, जो पाठक को भीतर तक झकझोरता है और लंबे समय तक स्मृति में बना रहता है।

Author

ज्ञान प्रकाश विवेक

Format

Paperback

ISBN

978-81-99725-08-9

Language

Hindi

Pages

204

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

उपन्यास

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