हिंदी साहित्य के क्षेत्र में कविवर श्री कृष्ण कुमार चौधरी, जो के. के. चौधरी के नाम से प्रख्यात हैं, की कविताओं का यह दूसरा स्वतंत्र संकलन है। कृष्ण कुमार जी भावुक और संवेदनशील होने के साथ-साथ समय के साथ चलने वाले एक अथक यात्री की भाँति हैं।
प्रस्तुत संकलन ‘उसके होने की आहट’ उनके चित्त की गहरी बुनावट की साक्षी है। प्रेम के मधुर भाव के साथ दुःख को भी एक महाराग के रूप में प्रस्तुत करना, पीड़ाओं को चंदन की तरह आदर देना, बदलते हुए संसार के प्रति एक दार्शनिक मनोभाव रखना जहाँ दुःख भी दुःखद नहीं लगता है, अपनी प्रिया के विछोह के बाद एक अंतहीन प्रतीक्षा भी जीवन का संबल बन जाती है। आपको अनेक कविताओं में उच्छल पीड़ाओं वाले तरंगित समुद्र का नाद सुनाई देगा। आत्मा की इस पीड़ा को कोई पीड़ित मन ही समझ सकता है।
मैं स्नेह और आदर के साथ श्री कृष्ण कुमार चौधरी जी की इस नई कृति ‘उसके होने की आहट’ का हार्दिक स्वागत करता हूँ और कह सकता हूँ कि हलाहल विष पीने वाला ही नीलकंठ शिव हो सकता है, यही पीड़ा कल्याण-भाव की ओर ले जा सकती है।
-महेंद्र मधुकर
प्रोफ़ेसर एमेरिटस (यू. जी. सी.)



Reviews
There are no reviews yet.