शीशे का घर / प्रवीण परिमल

299.00

- +
Buy Now
Category: Tag:

प्रवीण परिमल जी ने ज़िंदगी की वास्तविकता को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखा और परखा है। उन्हें अपने ज़माने के उतार-चढ़ाव, इंसानों के दो चेहरे, नैतिक मूल्यों के पतन, रिश्तों के टूट जाने, समाज का खोखलापन एवं सियासत की जादूगरी का भरपूर एहसास है। उनकी फ़िक्र की बुलंदी ने उनके शेरी शऊर (पोएटिक कॉन्सिअसनेस) को शक्ति प्रदान किया है। उनके अशआरों से एक फ़नकार के जज़्बे की शिद्दत और एहसास की ताज़गी का यक़ीन होता है। और मुझे यह कहने में बिल्कुल झिझक नहीं कि परिमल की शायरी का ख़मीर जीवन की गहराई, कल्पना की कुव्वत और प्रस्तुत करने की कला से सुशोभित है।

Author

प्रवीण परिमल

Format

Hardcover

ISBN

978-93-49947-56-6

Language

Hindi

Pages

112

Genre

ग़ज़ल

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “शीशे का घर / प्रवीण परिमल”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shopping Cart
Scroll to Top