मुक्तक संग्रह ‘शब्द सुरेखा’ भी एक ऐसे ही युवा कलमकार के परिश्रम का प्रतिफल है, जिसके मनाक्ष का केंद्र बिंदु आसपास की निगाहों से अदृश्य व्यस्त रहा… काव्य का सहज-सरल पथ ढूँढ़ने में। सृजन की बेल पोषण करने में निरत तल्लीन रही। चिंतन की पगडंडियों पर चाहत का उन्मादी सफ़र के परिणामस्वरूप पिछले कुछ ही वर्षों में मंचों पर अपनी मधुर प्रस्तुतियों से प्रभावित कर काव्य जगत में प्रविष्ट करने वाले राजेश श्रीवास्तव आज किसी परिचय के मोहताज नहीं। इनकी काव्यांजलि से विशेष रूप से मुक्तकों की बारिश होती है। अल्पावधि में ही लोगों के दिलो-दिमाग पर उभरा यह नाम है-‘राजेश श्रीवास्तव’। कलमकार की पहली पुस्तक के रूप में यह मुक्तक संग्रह ‘शब्द सुरेखा’ अपने भीतर संचित बेहतरीन मुक्तकों से इनके भीतर की छिपी शब्दवेदना को प्रकट करने के लिए कारगर रहा है।
– राजेश प्रभाकर



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